Tuesday, July 12, 2011

SANDEEP KANWAL

पलकै लागैं, उसकी सूरत प्यारी-प्यारी म्हं।
कसूता फसगा, ओ मास्टर जी इश्क बीमारी म्हं।।
पहलंम पहला उसतै मेरी आंख चार होई,
वा भी मेरअ् प्यार म्हं जी, एकैदम बीमार होई,
डाक्टर बणकै नै, काटूं रात सारी म्हं। 1
कसूता फसगा, ओ मास्टर जी इश्क बीमारी म्हं।।
फेर प्यार का खेल बढ़ा, मैं भी घर तै रहूं कढ़ा,
हम माहरै दोनूआं का मेल बढ़ा, मैं भी सूली पै चढ़ा,
रोज घुमाउं, उसनै मोटर लारी म्हं। 2
कसूता फसगा, ओ मास्टर जी इश्क बीमारी म्हं।।
एक दिन खेलण लागरे, हाम दोनूं रेत म्हं,
वा बरसीन काटण लागी, बैठकै नैं खेत म्हं,
फूल से खिलरे, वा बैठी जिस क्यारी म्हं। 3
कसूता फसगा, ओ मास्टर जी इश्क बीमारी म्हं।।
मास्टर जी समझाओ नैं, कुछ तो भेद बताओ नै,
कूकर लिकडूं बाहर इसतै, रस्ता मन्नै दिखाओ नै,
इब ब्याह की तैयारी म्हं। 4
कसूता फसगा, ओ मास्टर जी इश्क बीमारी म्हं।।
पलकै लागै, उसकी सूरत प्यारी-प्यारी म्हं।
कसूता फसगा, ओ मास्टर जी इश्क बीमारी म्हं।।

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