Tuesday, July 12, 2011

स्ंदीप कंवल भुरटाना

इश्क जाल म्हं फंसगा छौरे, तेरअ् कै काम आवैगा,
तू बोव पेड़ बबूल का, आम कूकर खावैगा,
रोज-रोज तै नए कबाड़ै, कर-कर आवै सै,,
छोटी-छोटी छोरियां तैं क्यूं, आंख मिलावै सै,,
इतणी छोरियां का एकदम बोझ कूकर ठावैगा,
प्रेम की टिकट ले राख्यी तनै, क्यूं होरया सै लेट
अलबाध करा बिना तेरा, कोन्या भरता पेट,
तनै कोण पहुचाव ठेठ, तु नहीं पोंच पावैगा,
लेटर, फोन राख-राख कै, प्रेम जाल म्हं फसरा,
इश्क का कीड़़ा तेरे दिल म्हं, घर बणाके बसरा,
बिना काम मोह म्हं धसरा, काल तनै आकै खावगा,
राह पै आजा बावले क्यूं नित डिगावै सै,
सारे घरकै तनै बड़े, प्यार तै चाहवें सैं,
सन्दीप तनै समझाव सै, लिकड़ा ना जावगा,
इश्क जाल म्हं फंसगा छौरे, तेरअ् कै काम आवैगा,
तू बोव पेड़ बबूल का, आम कूकर खावैगा,

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